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मानवता का राज्याभिषेक

आवो मिलकर मानवता का राज्याभिषेक करते हैं !! वर्षों से सामान्य स्थिति को उसकी चरम सीमा तक दुरुपयोग किया जाता रहा है । आज वैसी ही स्थिति है जैसे कि एक रस्सी को इतना खींच दिया गया हो कि वह किसी पक्षी की ज़रा सी चोंच मारने से ही टूट जाए। अब चूँकि रस्सी टूट चुकी है तो क्या हम इसके टूटे सिरों को फिर से बाँध दें या फिर इस टूटी रस्सी के बल पूरी तरह से खोलकर देखें कि हम उससे क्या नया बुन सकते हैं ? कोविड- 19 हमें यह दिखा रहा है कि जब मानवता किसी एक उद्देश्य के लिए एक साथ आ जाती है तो आश्चर्यजनक तीव्र गति से परिवर्तन संभव हो सकते हैं। संसार की किसी भी समस्या का हल असलियत में कठिन नहीं है लेकिन हमारे बीच असहमतियों के कारण उनका हल ढूँढना कठिन हो जाता है। सामंजस्यता में , मानवता की रचनात्मक शक्ति असीम होती है। कुछ महीने पहले तक हमने क्या क्या नहीं किया - व्यावसायिक उड़ान हों  या  यात्रायें , ताली हों या थाली बजाना , सभी अकल्पनीय थे और मूर्खतापूर्ण लगता था . कोविड का संकट यह दर्शाता है कि जब हम वास्तव में किसी महत्...